समावेशी शिक्षा व्यवस्था का आधार है हाइब्रिड लर्निंग, पढ़ें डॉ सतेंद्र कुमार का आलेख
डॉ सतेंद्र कुमार, सहायक प्राध्यापक, डिपार्टमेंट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग,आईआईटी पटना
Hybrid Learning: कनीक में हो रहे निरंतर नवाचार ने समय के साथ ज्ञान प्राप्त करने और उसे साझा करने के पारंपरिक तरीकों में आमूलचूल परिवर्तन ला दिया है. आज का शैक्षणिक परिदृश्य ऐसे चौराहे पर खड़ा है, जहां विद्यार्थियों के पास सदियों पुरानी पारंपरिक कक्षा आधारित शिक्षा और आधुनिक डिजिटल शिक्षण मंचों के बीच चयन करने की स्वतंत्रता है. हालांकि, इन दोनों प्रणालियों का अंतिम लक्ष्य ज्ञान और कौशल का विकास करना ही है, पर इनकी कार्यप्रणाली, प्रभावशीलता और सीमाएं एक-दूसरे से काफी भिन्न हैं. इन्हें एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखने के बजाय यह समझना आवश्यक है कि ये दोनों ही शिक्षा की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने के पूरक साधन हैं.
दशकों से कक्षा आधारित शिक्षा ही शिक्षण की सर्वाधिक विश्वसनीय और प्रमुख माध्यम रही है. इस व्यवस्था की सबसे बड़ी शक्ति प्रत्यक्ष संवाद है. यह ढांचा विद्यार्थियों को तुरंत प्रश्न पूछने, जटिल विषयों पर चर्चा करने और अपने शिक्षकों से तत्काल मार्गदर्शन प्राप्त करने की अनुमति देता है. स्कूल-कॉलेज की एक संरचित समय-सारिणी छात्रों के जीवन में अनुशासन, समय पालन और नियमित अध्ययन की आदतों को गहराई से........
