इबोला भारत से दूर, पर तैयारी जरूरी, पढ़ें डॉ चंद्रकांत लहारिया का आलेख
डॉ चंद्रकांत लहारिया, वरिष्ठ चिकित्सक और महामारी विशेषज्ञ
Ebola Virus: भारत और अफ्रीकी संघ ने मई के अंतिम सप्ताह में नयी दिल्ली में आयोजित होने वाले भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन स्थगित कर दिया है. ग्लोबल बिग कैट पहल से जुड़ी एक अन्य अंतरराष्ट्रीय संरक्षण बैठक को भी टाल दिया गया है. इस बीच भारत ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, युगांडा और दक्षिण सूडान की गैर-जरूरी यात्रा के खिलाफ एडवाइजरी जारी की है. यह सब तीन अफ्रीकी देशों में इबोला के प्रकोप के कारण हुआ है. यह पहली बार नहीं है जब इबोला ने वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों को प्रभावित किया हो. यह इस बात की भी याद दिलाता है कि संक्रामक रोगों के प्रकोप अब केवल स्वास्थ्य संबंधी मामले नहीं रह गये हैं.
डब्ल्यूएचओ ने 17 मई को कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में बुनडिबुग्यो वायरस से फैले इबोला के प्रकोप के बाद इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित की. फिर युगांडा और दक्षिण सूडान में भी इबोला रोग के मामले सामने आये. इबोला रोग इबोला वायरस परिवार के कई वायरसों के कारण होता है. जहां जायरे इबोला वायरस के लिए वैक्सीन और कुछ उपचार संबंधी प्रगति उपलब्ध है, वहीं वर्तमान बीमारी बुनडिबुग्यो वायरस के कारण फैल रही है, जिसके लिए न लाइसेंस प्राप्त वैक्सीन है, न कोई प्रमाणित उपचार उपलब्ध है.
बुनडिबुग्यो वायरस की पहचान पहली बार 2007 में युगांडा में हुई थी. अन्य इबोला वायरसों की तरह यह भी बुखार, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, दस्त, रक्तस्राव, शॉक और गंभीर मामलों में कई अंगों के फेल होने जैसी स्थिति पैदा कर........
