गहनों से अधिक निवेश के लिए बढ़ी है सोने की मांग
Demand for Gold : भारत में प्राचीन काल से ही लोग स्वर्णाभूषणों के लिए सोने की खरीदारी करते रहे हैं. एक समय हमारा देश सोने के उत्पादन में भी अव्वल था. पर समय बदला और भारत के विश्वविख्यात कोलार खदानों के स्रोत सूख गये. देश को आयात पर निर्भर होना पड़ा, फिर भी सोने के प्रति लोगों की दीवानगी कम नहीं हुई. सोने की बढ़ती खपत को रोकने के लिए 1968 में गोल्ड कंट्रोल एक्ट बनाया गया था. इसका उद्देश्य सोने के आभूषणों के उत्पादन, वितरण, और भंडारण पर नियंत्रण करना था. इसके तहत जनता के लिए सोने की छड़ों और सिक्कों के रूप में सोना रखना निषिद्ध कर दिया गया. सुनारों को भी सौ ग्राम से अधिक सोना रखने की मनाही थी. इस कानून ने बड़े पैमाने पर तस्करी को जन्म दिया. आखिरकार सरकार ने 1990 में इस कानून को निरस्त कर दिया. इसके बाद से भारत में सोने के आयात में लगातार वृद्धि होने लगी. वर्ष 2000-2001 में भारत ने 471 टन सोने का आयात किया था, जो 2012-2013 तक 1,000 टन से अधिक हो गया. वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में सोने का आयात 721.03 टन रहा. यह आयात हमारे व्यापार घाटे को बढ़ा रहा है.
गहने बनाने के अतिरिक्त सोने की वैसी कोई खास उपयोगिता नहीं है. पर एक नयी बात देखने में आ रही है कि अब लोग........
