अल नीनो से निपटने की व्यापक तैयारी हो
El Nino Effect : वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस साल का अल नीनो अब तक दर्ज सबसे मजबूत घटनाओं में से एक हो सकता है, जिसे अक्सर ‘सुपर’ अल नीनो कहा जाता है. इस बार का अल नीनो ऐसे ग्रह पर विकसित हो रहा है, जो कुछ दशक पहले की तुलना में काफी अधिक गर्म है. भारत में अल नीनो के ताप प्रभाव पहले से ही दर्ज हैं. केवल 2024 में ही, भारतीय कृषि श्रमिकों ने औसतन 648 घंटे, यानी 54 पूरे कार्यदिवस, ऐसी गर्मी के कारण खो दिये.
इस बीच, भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) ने दक्षिण-पश्चिम माॅनसून के दौरान दीर्घकालिक औसत के 90 फीसदी के बराबर सामान्य से कम वर्षा का अनुमान लगाया है. कमजोर माॅनसून की 60 फीसदी आशंका है, जिसका मतलब है कि कई क्षेत्रों में सामान्य से बहुत अधिक शुष्क परिस्थितियां या सूखा पड़ सकता है. इसे पिछले 26 वर्षों में सबसे कमजोर प्रारंभिक माॅनसून पूर्वानुमानों में से एक माना जा रहा है. और इसके प्रभाव दिखाई दे रहे हैं : 27 जून तक देश में 42 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गयी है. इसके व्यापक परिणाम हो सकते हैं-फसल विफलता या सामान्य से कम खाद्य उत्पादन, आपूर्ति में कमी और खाद्य मुद्रास्फीति. रिजर्व बैंक ने अल नीनो को मुद्रास्फीति के लिए बड़ा जोखिम बताते हुए कहा है कि इससे खाद्य कीमतों में तेज वृद्धि हो सकती है.
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने हाल ही में भारत को उन देशों में शामिल किया है, जो कृषि सूखे के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हैं. देश के बड़े हिस्से पहले से सूखे की चपेट में हैं. आइआइटी,........
