'इंडिया' गठबंधन को नयी ऊर्जा की जरूरत
India Alliance : यह शायद पहला मौका है, जब कांग्रेस पार्टी के नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस (इंडिया) ब्लॉक के नेताओं की मीटिंग में दिया गया अपना कोई भाषण आम जनता के सामने रखा है. इस भाषण में उन्होंने जिस तरह से एकजुट विपक्षी प्रतिरोध खड़ा करने की आज आवश्यकता बतायी है, वह तारीफ के काबिल है. हालांकि, वास्तव में एक मजबूत और टिकाऊ विपक्षी प्रतिरोध खड़ा करने के लिए कुछ रचनात्मक सुझावों पर गौर करना भी आवश्यक है. मैंने ‘इंडिया’ गठबंधन की अब तक की सभी बैठकों में हिस्सा लिया है. इनमें जून, 2023 में पटना में हुई वह शुरुआती बैठक भी शामिल है, जब गठबंधन ने अभी ‘इंडिया’ नाम भी नहीं अपनाया था.
‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में दिया गया राहुल गांधी का भाषण जहां एक ओर भरोसा जगाता है, वहीं दूसरी ओर कुछ चिंताएं भी पैदा करता है. कांग्रेस की बैठक में उनका यह भाषण भले ही पूरी तरह असरदार लगता, पर 23 अलग-अलग विचारधाराओं वाली पार्टियों के उस साझा मंच पर, जो भारत के संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य की रक्षा के लिए एकजुट हुआ है, इस भाषण के कुछ हिस्से मुझे बेसुरे लगे. राहुल गांधी यह याद दिलाते हुए बिल्कुल सही हैं कि ‘पूर्ण स्वराज’ को आधिकारिक लक्ष्य घोषित करने के बाद कांग्रेस एक प्रतिरोध आंदोलन के रूप में उभरी.
वह प्रस्ताव 1927 के मद्रास अधिवेशन में रखा गया था और 1929 के लाहौर अधिवेशन में पास हुआ था. उसके बाद सचमुच कांग्रेस आजादी की लड़ाई में सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आयी, जिसमें कम्युनिस्ट,........
