सिजेरियन प्रसव में नहीं आ रही है कमी
-उम्मन सी कुरियन, सीनियर फेलो व हेड हेल्थ इनिशिएटिव, ओआरएफ-
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने 29 मई को नवीनतम एनएफएचएस (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण)-6 (2023-24) के फैक्ट शीट जारी किये, जिसमें 715 जिलों के करीब 6.79 लाख परिवारों को शामिल किया गया है. नवीनतम सर्वेक्षण एनएफएचएस-5 (2019-21) की तुलना में मातृ स्वास्थ्य, बाल टीकाकरण और पोषण में व्यापक स्तर पर हुए सुधारों की ओर इशारा करता है. जैसे, संस्थागत प्रसव 90.6 फीसदी (88.6 फीसदी से बढ़कर) तक पहुंच गया, प्रसवपूर्व देखभाल का दायरा बढ़कर 95.9 फीसदी (92.6 प्रतिशत से) हो गया, और स्किल्ड बर्थ अटेंडेंस में 91.3 फीसदी तक सुधार हुआ. बारह-तेईस महीने की उम्र के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज कार्ड-आधारित अनुमानों पर 87.1 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिसमें रोटावायरस टीकाकरण 36.4 फीसदी के दोगुने से भी अधिक बढ़कर 85.4 प्रतिशत हो गया. हालांकि कई संकेतक चिंताजनक हैं.
छह महीने से कम उम्र के शिशुओं में केवल स्तनपान 63.7 फीसदी से घटकर 55.8 फीसदी रह गया. सार्वजनिक सुविधाओं में होने वाले संस्थागत जन्मों की हिस्सेदारी 61.9 प्रतिशत से घटकर 58.6 फीसदी रह गयी, जो समग्र संस्थागत प्रसव दरों में वृद्धि के बावजूद निजी प्रसव देखभाल के प्रति झुकाव को दर्शाता है. सिजेरियन सेक्शन (सी-सेक्शन) की दर 21.5 फीसदी से बढ़कर 27.2 फीसदी हो गयी, जो डब्ल्यूएचओ द्वारा अनुशंसित सीमा से काफी ऊपर है. आधुनिक गर्भनिरोधकों का उपयोग 56.4 फीसदी से घटकर 52.7 फीसदी रह गया. अधिक वजन, मोटापे से ग्रस्त महिलाओं की........
