काले-गोरे से कब मुक्त होगा समाज, प्रधान संपादक आशुतोष चतुर्वेदी का खास आलेख
Sarada Muraleedharan : किसी भी प्रदेश का मुख्य सचिव ब्यूरोक्रेसी में सबसे बड़ा पद होता है और हर प्रदेश के आइएएस का ख्वाब एक न एक दिन इस पद तक पहुंचने का होता है. आप इससे इस पद की अहमियत का अंदाजा लगा सकते हैं, लेकिन हाल में केरल की मुख्य सचिव ने जो कहा, वह अत्यंत चिंताजनक है और इस पर समाज को विमर्श करने की आवश्यकता है.
केरल की मुख्य सचिव शारदा मुरलीधरन ने कहा कि उन्हें काले रंग के कारण बार-बार अपमान सहना पड़ा है. उन्होंने कहा कि अनेक बार लोग उनकी तुलना उनके पति से करते हैं और कहते हैं कि शारदा उतनी ही काली हैं, जितने गोरे उनके पति वेणु हैं. गौरतलब है कि केरल की मुख्य सचिव शारदा मुरलीधरन से पहले उनके पति डॉ वी वेणु केरल के मुख्य सचिव पद पर तैनात थे. शारदा मुरलीधरन ने बताया कि हाल ही में किसी ने उनके और उनके पति के बतौर मुख्य सचिव कार्यकाल की तुलना की थी और सार्वजनिक रूप से कहा था कि दोनों में अहम अंतर यह है कि शारदा मुरलीधरन काली हैं और उनके पति गोरे हैं.
इन टिप्पणियों से आहत शारदा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कैसे काली होने के कारण उन्हें बचपन से ही अपमान सहना पड़ा है. उन्होंने लिखा कि उन्हें उनके पति ने इस बारे में सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को कहा. बाद में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि समाज को अपना नजरिया बदलने की जरूरत है. इस बदलाव की शुरुआत सबसे पहले घर से होनी चाहिए, फिर स्कूल तक यह बदलाव होना चाहिए.
दरअसल, शारदा मुरलीधरन ने पिछले........
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