India Nepal Relation: भारत-नेपाल रिश्तों में समझदारी जरूरी, पढ़ें डॉ सौरभ का आलेख
India Nepal Relation: पिछले दो हफ्तों में नेपाल के सत्तारूढ़ दल आरएसपी, यानी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रवि लामिछाने तथा उसके बाद विदेश मंत्री शिशिर खनाल की नयी दिल्ली यात्रा दोनों देशों के संबंधों की घनिष्ठता को ही दर्शाती है. नेपाल में जेन-जी आंदोलन के बाद हुए आम चुनाव में बालेंद्र शाह जवाबदेही और सुशासन को आधार बनाकर अपूर्व जन समर्थन हासिल करते हुए प्रधानमंत्री बने हैं. प्रधानमंत्री द्वारा अपने पार्टी अध्यक्ष तथा विदेश मंत्री को एक के बाद एक नयी दिल्ली भेजना यह इशारा करता है कि भारत के साथ संबंधों को नेपाल एक नयी दिशा देने के लिए बेहद उत्सुक है.
अपने भारत दौरे पर राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी प्रमुख रवि लामिछाने ने जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाकात की, वहीं दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने भी आपसी हितों और सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने की आवश्यकता जतायी. गौरतलब है कि दोनों विदेश मंत्रियों की मुलाकात मॉरीशस में हुए हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान भी हुई थी, जिसमें भारत ने अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति के तहत उच्च स्तरीय सहयोग बढ़ाने तथा सहयोग की गति बनाये रखने पर जोर दिया था.
तथ्य यह है कि नेपाल में पिछली कई सरकारों ने सत्ता बचाये रखने के लिए आक्रामक राष्ट्रवाद को अपनी ढाल बनाया तथा कालापानी-लिंपियाधुरा मानचित्र विवाद उभार कर, नेपाली नोटों पर भारतीय क्षेत्रों को दर्शा कर, भगवान राम की जन्मस्थली पर विवाद पैदा कर तथा अग्निवीर योजना आदि पर आक्रामक राजनीतिक राष्ट्रवाद का........
