भीतरी बगावत है पीओके से उठी आवाज, पढ़ें आनंद कुमार का आलेख
PoK Protest: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चल रहा आंदोलन 1947 के बाद से इस क्षेत्र में पाकिस्तान के सामने खड़ी सबसे गंभीर राजनीतिक चुनौतियों में से एक है. पहली नजर में यह विवाद विधानसभा की 45 में से 12 सीटों के आरक्षण का मुद्दा प्रतीत होता है, जो उन शरणार्थियों के लिए सुरक्षित हैं, जो विभाजन के बाद भारतीय जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान चले गये थे, किंतु यह पूरा सच नहीं है. दरअसल, पीओके में जो कुछ हो रहा है, वह राजनीतिक प्रतिनिधित्व, आर्थिक उपेक्षा, क्षेत्रीय पहचान और पाकिस्तान की सैन्य-राजनीतिक व्यवस्था के अत्यधिक हस्तक्षेप के विरुद्ध वर्षों से जमा होते आ रहे असंतोष का विस्फोट है. यह केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि पाकिस्तान की उस व्यवस्था के विरुद्ध भीतर से उठी चुनौती है, जिसने लंबे समय से इस क्षेत्र को अपने सामरिक हितों के अनुरूप संचालित किया है.
वर्तमान आंदोलन की तात्कालिक वजह विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को खत्म करने की मांग है. ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं, जो भारतीय जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में बस गये थे. पाकिस्तान का तर्क है कि यह व्यवस्था कश्मीर के पूरे भूभाग पर उसके दावे को मजबूत करती है और विस्थापित कश्मीरियों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान करती है. पर पीओके के स्थानीय निवासियों की दृष्टि में यह व्यवस्था लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का प्रतीक बन चुकी है. उनका कहना है कि विधानसभा की लगभग एक-चौथाई सीटों पर ऐसे लोग क्यों चुने जायें, जो न इस क्षेत्र में रहते हैं, न ही यहां के लोगों की समस्याओं से उनका सीधा........
