राष्ट्रीय डाटा केंद्र और रणनीतिक जीपीयू रिजर्व देश में ही बनें, पढ़ें हरीश कुमार का आलेख
हरीश कुमार, पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर, आरवीएस इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी सह सीइओ एंड फाउंडर बिल्टक्यू एआइ
GPU Reserve: हाल ही में अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक ने अपने मायथॉस क्लास के अत्याधुनिक मॉडल्स फेबल-5 और मायथॉस-5 लांच किये, तो दुनिया में उत्साह की लहर दौड़ गयी थी, पर तुरंत ही अमेरिका ने गैर-अमेरिकी उपयोगकर्ताओं और कंपनियों के लिए इन मॉडल्स पर पाबंदी लगा दी. यह वह भू-राजनीतिक हथियार था, जिसने भारत समेत तमाम विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को असहज कर दिया. यह घटना साबित करती है कि यदि आपका एआइ किसी और के क्लाउड, किसी और के मॉडल और किसी और की आपूर्ति शृंखला पर निर्भर है, तो आपकी रणनीतिक संप्रभुता केवल किराये की है, जिसे मकान मालिक जब चाहे, रद्द कर सकता है.
आज भारत के पास दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एआइ टैलेंट पूल है, हमारा टेक्नोलॉजी उद्योग 315 अरब डॉलर का है, और रिजर्व बैंक के अनुमान बताते हैं कि जनरेटिव एआइ 2030 तक हमारी जीडीपी में 400 से 500 अरब डॉलर का अतिरिक्त योगदान दे सकता है. पर हमारी पूरी ताकत केवल ‘एप्लिकेशन’ (अनुप्रयोग) और ‘सर्विस लेयर’ (सेवाओं) तक सीमित है. यह निर्भरता भारत को दो घातक जालों में जकड़ रही है. एक है सॉफ्टवेयर और मॉडल का जाल. जब हमारे बैंक,........
