menu_open Columnists
We use cookies to provide some features and experiences in QOSHE

More information  .  Close

आप संसदीय दल का टूटना तय था

21 0
27.04.2026

AAP : यह तो होना ही था. हैरानी इस पर नहीं कि आप क्यों टूटी? हैरानी इस बात पर है कि इतनी देर से क्यों टूटी? आप संसदीय दल के दो टुकड़े होना, मेरे लिए वह खबर है, जिसका लंबे समय से मैं इंतजार कर रहा था. आप के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़ी और भाजपा से जा जुड़े. इन सात में से तीन वे हैं, जो कभी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल की आंख और कान हुआ करते थे. उनके पास इतनी पावर थी कि पार्टी के बेहद वरिष्ठ लोग भी उनसे ईर्ष्या करते थे. केजरीवाल उनकी ही सुनते थे. पर उन्हीं लोगों ने बगावत की, जिन्हें पार्टी ने बनाया, संवारा और कम उम्र में पहचान दी. बाहर के लोगों को यह सुनकर हैरानी हो सकती है, लेकिन जो लोग पार्टी चलाने के केजरीवाल के तरीके से वाकिफ हैं, वे जानते हैं कि एक दिन ऐसा होना ही था. दरअसल आप जिन उद्देश्यों के लिये बनी थी, उनसे वह भटकने लगी. जब वह दूसरी पार्टियों की तरह हो गयी और उनकी तरह बर्ताव करने लगी, तब यह होना स्वाभाविक ही था.

जब आप बनी और मुझ जैसे लोग इसमें शामिल हुए, तब यह नारा था, ‘हम राजनीति करने नहीं, राजनीति को बदलने आये हैं’. लेकिन जैसे-जैसे कारवां बढ़ता गया, सत्ता के खेल में जुड़ता गया, वैसे-वैसे यह नारा फीका पड़ता गया. जो परंपरागत राजनीति को बदलने आयी थी, वह खुद परंपरागत राजनीति का शिकार हो गयी. आज आप और दूसरे दलों में कोई फर्क नहीं बचा है. आम आदमी पार्टी लाखों-करोड़ों लोग का ख्वाब थी.

वह ख्वाब, जो इस देश को भ्रष्टाचार मुक्त देखना........

© Prabhat Khabar