हम होनहार उद्यमियों तक तेजी से ऋण पहुंचायेंगे
जब 2020 में कोविड-19 महामारी ने लोगों के जीवन और आजीविका पर बुरा असर डाला, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महसूस किया कि फिर से पूर्व स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. इसे सबसे छोटे उत्पादकों और उद्यमों तक भी पहुंचना चाहिए, खासकर उन उद्यमों तक, जो भारत के गांवों और छोटे शहरों में कार्यरत हैं.
इस उद्देश्य के साथ, उस वर्ष आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (पीएमएफएमइ) शुरू की गयी थी. उसकी शुरुआत खाद्य अर्थव्यवस्था के उस हिस्से के साथ हुई, जो लंबे समय तक औपचारिक वित्त और संस्थागत समर्थन से बाहर रहा था : सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण, जो पहले ही उत्पादन व बिक्री कर रहे थे और कुछ लोगों को रोजगार दे रहे थे, लेकिन जिनके पास आगे बढ़ने के लिए आवश्यक पूंजी या मार्गदर्शन नहीं था.
पीएमएफएमइ के ऋण से जुड़े घटक के तहत अब तक दो लाख से अधिक मंजूरियां दी जा चुकी हैं. यह उपलब्धि इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके पीछे वे उद्यमी हैं, जो औपचारिक ऋण प्रणाली से जुड़े हैं और जिन्हें अपने उद्यम निर्माण का असली मौका मिला है. यह जश्न मनाने लायक उपलब्धि है. इनमें सबसे पहले व्यक्ति जमनालाल पाटीदार थे, जिनका आवेदन........
