बड़ी चिंता का कारण बन रही मॉनसून की सुस्ती, पढ़ें सविता कुमारी का आलेख
सविता कुमारी, पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर,शोधार्थी, तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय
Monsoon: भारत में मॉनसून सिर्फ एक मौसमीय घटना नहीं, बल्कि देश की कृषि, अर्थव्यवस्था और करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण आधार है. देश की लगभग आधी से अधिक कृषि आज भी वर्षा पर निर्भर है. यही कारण है कि हर वर्ष मॉनसून की दस्तक का इंतजार केवल मौसम वैज्ञानिक नहीं, किसान, सरकार, उद्योग जगत और आम लोग भी बेसब्री से करते हैं. इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने शुरुआत में काफी उम्मीदें जगाई थीं. लेकिन जून के तीसरे सप्ताह तक आते-आते मॉनसून की रफ्तार अचानक धीमी पड़ गयी और देश के कई हिस्सों में वर्षा की भारी कमी दर्ज की गयी. ऐसे समय में जब किसान खरीफ फसलों की बुआई में जुटे हैं, मॉनसून की यह सुस्ती चिंता का कारण बन गयी है.
जून और जुलाई का शुरुआती दौर खरीफ फसलों की बुआई का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है. धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, अरहर और बाजरा जैसी फसलें काफी हद तक वर्षा पर निर्भर होती हैं. यदि अगले कुछ दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती, तो किसानों को बुआई टालनी पड़ सकती है. इससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और पैदावार प्रभावित हो सकती है. इसके अलावा जलाशयों और बांधों........
