बच्चों को डिजिटल खतरों से बचाने की बने नीति, पढ़ें प्रवीण कौशल का आलेख
प्रवीण कौशल, एआइ डाटा सेंटर मृकाल के निदेशक
Social Media: सोशल मीडिया हमारे दैनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है, खासकर बच्चों और युवाओं के लिए इसका महत्व और भी अधिक है. शिक्षा से लेकर मनोरंजन तक और आपसी संचार से लेकर अपनी रचनात्मकता दिखाने तक सोशल मीडिया का प्रभाव हर क्षेत्र में महसूस किया जा रहा है. हालांकि, इसके व्यापक प्रसार के साथ युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों ने दुनिया भर में गंभीर बहस को जन्म दिया है. अनेक देश सोशल मीडिया के विनियमन की दिशा में कदम उठा रहे हैं.
ऑस्ट्रेलिया ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है. ऐसे ही कड़े उपायों पर ब्रिटेन, नॉर्वे और फ्रांस जैसे देश भी विचार कर रहे हैं. अमेरिका में 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए पहले से ही माता-पिता की सहमति अनिवार्य है, जबकि चीन ने नाबालिगों के इंटरनेट उपयोग के लिए सख्त समय-सीमा और कर्फ्यू जैसे नियम लागू किये हैं. भारत में ऐसा कोई कानून मौजूद नहीं है, पर यहां भी इस विषय पर चर्चा तेज हो रही है.
सोशल मीडिया के नियमन के पीछे सबसे बड़ा तर्क छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाला नकारात्मक प्रभाव है. शोध स्पष्ट करते हैं कि........
